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3 December 2013

फर्जी स्कीमों में डूबी राशि एक बार गई तो वापस नहीं मिलेगी


नई दिल्ली । बहुत कम समय में धन दोगुना करने वाली स्कीमों में आप अपने जोखिम पर ही पैसा लगाएं। हो सकता है कि ऐसा झांसा देने वाले जालसाज बाद में गिरफ्त में भी आ जाएं, लेकिन इसके बावजूद आपको अपनी गाढ़ी कमाई वापस होने की गारंटी नहीं है। स्पीक एशिया और सारधा समूह की स्कीमों में पैसा लगाने वाले लोगों के साथ यही हो रहा है। दोनों घोटालों के कर्ताधर्ता पुलिस गिरफ्त में तो आ गए, मगर आम जनता की पैसा मिलना फिलहाल नामुमकिन दिख रहा है। बंगाल में राजनीतिक हड़कंप मचाने वाले सारधा समूह घोटाले की जांच से जुड़े कंपनी मामलों के मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि निवेशकों की राशि को तलाशना ही सबसे बड़ी चुनौती है। कंपनी की तमाम परिसरों से जो कागजात जब्त किए गए हैं, उनसे कहीं भी यह सूचना नहीं मिल पा रही है कि निवेशकों की राशि कहां लगाई गई है। आशंका तो यह है कि कंपनी ने निवेशकों की जमा राशि का बहुत बड़ा हिस्सा न निवेश किया है और न ही इसका कोई हिसाब-किताब रखा है। कंपनी से सिर्फ 37 करोड़ जब्त किए गए हैं, जबकि उसे लगभग 17 लाख निवेशकों को सिर्फ मूल धन के तौर पर 1,983 करोड़ रुपये देने हैं ! बंगाल, असम, उड़ीसा जैसे राज्यों से लाखों निवेशकों के लगभग दो हजार करोड़ रुपये लेकर भागी इस कंपनी के घोटाले की जांच केंद्र सरकार की दो एजेंसियां- प्रवर्तन निदेशालय और गंभीर अपराध जांच कार्यालय (एसआइएफओ) कर रही हैं। इसी तरह से फ्रॉड करने वाली एक अन्य कंपनी स्पीक एशिया के प्रमुख आरएस पाल की गिरफ्तारी के बावजूद निवेशकों को कोई राहत मिलती नहीं दिख रही। दिल्ली पुलिस ने दो दिन पहले ही इसे दबोचा है। माना जाता है कि कंपनी ने आम आदमी को घर बैठे बंधीबंधाई मासिक आमदनी देने का झांसा देकर देश भर में 2,200 करोड़ रुपये का चूना लगाया है।
कंपनी मामलों के मंत्रालय ने आंतरिक तौर पर इसकी जांच काफी पहले शुरू कर दी थी। मंत्रलय के अधिकारियों का कहना है कि स्पीक एशिया ने जनता से बटोरी गई राशि को गैरकानूनी तरीके से देश से बाहर भेजा है। इसके सारे अंतरराष्ट्रीय लेनदेन का ब्योरा इकट्ठा करना ही अपने आप में टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। हांगकांग, दुबई, नेपाल के जरिये भारत से पैसा बाहर भेजा गया है। अभी तक जांच एजेंसियों ने इस कंपनी के 200 बैंक खातों को जब्त किया है। इनमें सिर्फ 140 करोड़ रुपये जमा हैं।
Source: MLM News paper & Jagran
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9 October 2013

Update About 3rd October Bhilwara Meeting


 3 अक्टूबर को रूबी एंड एबव कि मीटिंग में हुई चर्चा के कुछ मुख्य बिन्दु:
1)एक ऐसे एजुकेशन सिस्टम पर काम शुरू हो रहा है जो कंपनी से बिलकुल अलग होगा और जो अगले 2-3 महीने में बन कर तैयार होने केबाद पुरे भारत में एक जैसी एजुकेशन दिखाई देने लगेगी
2)आर.सी.एम से आमदनी लेते हुए भी जो लोग आर.सि.एम कि बुराई करते हुए अलग एम.एल.एम कर रहे हैं उन पर शीघ्र कार्यवाही कि जां सकती है 
3)जो लोग अपने स्वार्थ के लिए दूसरों कि टीम को प्रलोभन देकर तोड़ रहे हैं उन पर भी शीघ्र कार्यवाही कि जा सकती है
4)न्युट्रीचार्ज कि ट्रेनिंग जल्द ही आम लोगों के लिए पुरे हिंदुस्तान में फिर से चालू होगी
5) अमिताभ जी और कुछ राष्ट्रीय न्यूज़ पेपर हमारा सहयोग करने के लिए तैयार हैं अगले 2-3 महीने में उनका सहयोग लेते हुए न्युट्रीचार्ज के प्रमोशन के लिए वृहत रणनीति तैयार कि जयेगि
6)टी.सी जी ने कहा न्युट्रीचार्ज के अलावा बाकी product पर जो काम हम कर रहे हैं अगले 2-3 महीने में उसके कुछ अच्छे परिणाम आप को दिखने लगेंगे 


Source : Nandlal Dangi
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24 July 2013

मेहनत की कामाई की सुरक्षा के उपाय


देश में बड़े पैमाने पर फाइनेंस के क्षेत्र में संभावनाओं के साथ विकल्प बढ़े रहे हैं। फाइनेंस के क्षेत्र का दायरा बढ़ने के साथ ही लोगों के पास निवेश करने के साथ-साथ पैसे बचाने के विकल्प बढ़ते जा रहे हैं। हालांकि फाइनेंस का दायरा बढ़ने के साथ कुछ गलत चीजें भी अपने पांव पसारने लगी हैं। आए दिन हम अखबरों में पढ़ते हैं कि वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है। इस पेशकश का मकसद यही है कि हम अपने मूल्यवान और मेहनत से कमाए हुई गाढ़ी कमाई की रक्षा कैसे करें। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर आनंद सिन्हा का कहना है कि आरबीआई में रजिस्टर्ड नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन (एनबीएफसी) और बैंकों की निगरानी आरबीआ द्वारा की जाती है। आम लोगों को सलाह है कि पैसे डिपॉजिट करने से पहले जांच लें कि जहां आप निवेश करने जा रहे हैं वो एनबीएफसी, आरबीआई में रजिस्टर्ड है और उसे जनता से डिपॉजिट लेने की मंजूरी है या नहीं। www.rbi.org.in/permittednbfcs पर आरबीआई में रजिस्टर्ड सभी एनबीएफसी कंपनियों की जानकारी उपलब्ध है। सेबी के चेयरमैन यू के सिन्हा का कहना है कि कलेक्टिव इंवेस्टमेंट स्कीम वाली कंपनियों को सेबी के साथ रजिस्टर्ड होना जरूरी है। सेबी से जुड़ी शिकायतों के लिए आप टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-622-7575, 1800-22-7575, साथ ही सेबी में ऑनलाइन शिकायत के लिए www.scores.gov.in पर शिकायत करें। सेबी की इन्वेस्टर एजुकेशन वेबसाइट http://investor.sebi.gov.in पर जरूर लॉनइन करें। अगर पता न हो कि किस मामले की शिकायत कि नियामक के पास करनी है तो ऐसे में आरबीआई या सेबी में से किसी के भी पास शिकायत की जा सकती है। शिकायत के मुताबिक संबंधित नियामक शिकायत पर कार्रवाई कर सकता है। मर्चेंट बैंकिंग कंपनियां, वेंचर कैपिटल फंड्स, स्टॉक ब्रोकिंग कंपनियां, सामूहिक निवेश वाली कंपनियां या योजनाओं और राज्स सरकार - चिट फंड कंपनियां से संबंधित शिकायतों के लिए सेबी में शिकायत कर सकते हैं। इंश्योरेंस कंपनियों के लिए आईआरडीए में शिकायत करें, नॉन बैंकिंग और नॉन फाइनेंशियल कंपनियों के लिए कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय में शिकायत करें। यहां जमाकर्ताओं के लिए एक जरूरी जानकारी देना चाहेंगे कि ज्यादा रिटर्न यानि ज्यादा जोखिम होता है। आरबीआई नियमों के मुताबिक एनबीएफसी कंपनियां 12.5 फीसदी से ज्यादा रिटर्न नहीं दे सकती हैं। वहीं सट्टेबाजी में रिटर्न की गारंटी नहीं होती है। गैर-पंजीकृत, पार्टनरशिप और प्रोपराइटरी कंपनियां आम जनता से डिपॉजिट नहीं ले सकती हैं। ऑनलाइन डिपॉजिट स्कीम्स की ऊंची ब्याज दर और मुनाफे के झांसे में न आएं। मल्टीलेवल मार्केटिंग स्कीम्स के ज्यादा रिटर्न की लालच में न फंसे।
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6 July 2013

Awareness programme among edible oil consumers by International organization


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12 February 2013

यह हैं Colgate की सच


ये है अमरीका में बिकने वाले कोलगेट का रेपर ....ध्यान से पढ़ें
ठीक से निचे दिया हुआ चित्र के ऊपर चेतावनी को पढ़ें ....जिसमे साफ़ साफ़ लिखा है कि इसे 12 साल की उम्र से कम के बच्चों की पहुंच से दूर रखें और मटर के दाने से अधिक मात्रा में प्रयोग नहीं करें।यदि बच्चा इससे अधिक मात्रा निगल ले तो तुरंत इमरजेंसी चिकित्सा लें। तथा जहर नियंत्रण अस्पताल जाएँ।लेकिन टीवी के एड में इससे चौगुनी मात्रा ब्रश पर लगा कर बच्चे को पेस्ट करते हुए दिखाया जाता है। डेंटिस्ट नितिन जैन के अनुसार, डेढ़ सौ ग्राम की टूथपेस्ट की ट्यूब में....140 मिलीग्राम फ्लोराइड होता है। जबकि 30 मिलीग्राम से भी कम फ्लोराइड एक नौ साल (औसत वजन 28 किलोग्राम) के बच्चे के लिए जानलेवा हो सकता है।

दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंस एंड रिसर्च (डिपसार) ने बड़ी कंपनियों के 34 टूथपेस्ट पेस्ट की जांच करने के बाद निष्कर्ष निकाला है कि लगभग सभी टूथपेस्ट कंपनियां लोगों के दांतों को बर्बाद करने में जुटी है। डिपसार के पूर्व निदेशक प्रोफेसर डॉ. एस.एस. अग्रवाल के अनुसार बाजार की सभी प्रचलित कंपनियों के टूथपेस्ट में निकोटिन की मात्रा बहुत अधिक पाई गई। निकोटीन जर्दे में पाये जाने वाला नशीला पदार्थ है, जिससे सिगरेट बनाई जाती है।

हड्डियों का झोल बिके चांदी के मोल

भारत के एक बहुत बड़े वैज्ञानिक और विशेषज्ञ के अनुसार हर ब्राण्डेड टूथपेस्ट में मरे हुए जानवरों की हडियां मिलाई जाती है। उन्होंने तो लेबोरेट्री में परीक्षण करके पुख्ता रिपोर्ट तैयार की है कि कौन से टूथपेस्ट में किस जानवर की हड्डियां मिलाई जाती हैं। इशारों में समझ जायें ये जानवर कोई भी हो सकता है। जो लोग टूथपेस्ट करते हैं वे भूल कर भी अपने को शाकाहारी न समझें। शाकाहारी जैन और हिन्दू यदि आपना धर्म बचाना चाहते हैं तो वे आज ही टूथपेस्ट का त्याग कर दें।



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24 November 2012

+92, +44, +95, +99 से सावधान.....



पड़ोसी देश पाकिस्तान के बाद अब यूके, बर्मा व मध्य पूर्व एशिया के देशों ने भी साइबर क्राइम को हथियार बनाते हुए भारत में ठगी का खेल शुरू कर दिया। प्रतिदिन देशवासियों के मोबाइल पर +92(पाकिस्तान), +44(यूके), +95(बर्मा), +99 (मध्य पूर्व एशिया के कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, जॉर्जिया व अन्य) से कॉल आकर लॉटरी, इनाम व अन्य प्रलोभन देकर ठगी की जा रही है। प्रतिदिन कोई न कोई उपभोक्ता इन नम्बरों का शिकार होने पर बीएसएनएल ने ग्राहकों को सावचेत करते हुए इन नम्बरो से बचने की हिदायत दी है।


बीएसएन अधिकारियों ने ग्राहकों मोबाइल पर आने वाली अवांछनीय विदेशी कॉल से बचने, तत्काल रिसीव नहीं करने व पुन: डॉयल के बारे में रोकते हुए कहा कि इससे आपके जेब कट सकती है। इन कॉल को उठाने पर आने बेलेंस में एक साथ कई राशि कम हो जाएगी। ऎसे कॉल महज आपकों परेशान या ठगी के खेल के लिए होते है। गौरतलब है कि इससे पूर्व देश में नाइजीरियाई व पाकिस्तान ठग सक्रिय थे। जिन्होंने भारत के अलावा कई देशों में लॉटरी से खूब लोगों को ठगा था। यह अभी भी ब्लेक लिस्टेड हैं।

गलत हाथों में पैसा


आईटी विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी कॉल करने वाले लोगों ने मोटे कमीशन का लालच देकर भारत में कई गुर्गो को पाल रखा है। यह लोग बैंक खातों से ठगी का पैसा निकालने का काम करते हैं। यही नहीं ठगी के शिकार लोगों से मुलाकात कर उन्हें और परेशान करते हैं। एकत्र राशि में से कुछ के आईटीजेड, डिस टीवी कूपन खरीद कर आदि जगह भेजकर ठगी करते है। ठगी के इस जाल में करोड़ों रूपए इधर-उधर हो चुके हैं।

बचें विदेशी कॉल के नम्बरों से

विदेशों से आने वाली कॉल के आगे +92, +95, +99, +44 नम्बर लिखे होते हैं। जो भी इस नम्बरों का शिकार बनता है गिरोह के सदस्य उनको किसी भी खुफिया एजेन्सी के अधिकारी बनकर भी डराते हैं। साइबर सिक्यूरिटी विशेषज्ञ अभिषेक धाबाई के अनुसार ऎसे कॉल भारत में तीन वर्ष से आ रहे हैं। ऎसे कॉल नकारना ही समझदारी है।     
Source : The bhaskar.com
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